Wednesday, August 30, 2017

कल, एक मिथ्या

यह कल क्या अपने साथ लाएगा?
चिंता,विस्मयता, अनिश्चित्ता, सवालों के झुण्ड,और जवाबों के तार?
यह कल क्या अपने साथ लाएगा?
जीवन का एक नया मोड़ या हर दिन की एक नयी दौड़?
क्या हमारा काल,कल आएगा,या सफलता का एक झरोका कल द्वार खट खटायेगा ?
यह कल क्या अपने साथ लाएगा?
इस कल का मैं सत्कार करूँ,आशाओं से इंतज़ार करूँ |
क्या मैं कल मैं जीता हूँ ? और आज को मैं खोता हूँ?
कल से मेरी आस जुडी, जो आज न हो पाया उसकी प्यास जुडी
अपने कल को खुद बनाऊं ,ऐसा प्रभु मुझे वरदान मिले ,
हिम्मत से अपनी, कल की फसलें लेहराऊं, किस्मत को मेरी ऐसा दान मिले|