Wednesday, June 3, 2020

तुम आ गए

लंबी रात्रि के तिमिर को चीरती हुई, जीवन को भविष्य रूपी प्रकाश से प्रज्वलित करने वाली, प्रातः काल की उस बेला की तरह, तुम आ गए।
नन्ही किलकारियों से, कातर क्रंदन से, और  अपने असीम भोलेपन से हमारे जीवन को अलंकृत करने, तुम आ गए।
माता से दूध का ऋण लेके और पिता कि गोद में शरणागत होके हमको अपनी पूर्णता का संज्ञान कराने तुम आ गए।
ब्रह्मण धर्म को जीवित रखने और वंश का ध्वज , काल चक्र में प्रशस्त करने, अत्रेया तुम आ गए।

No comments: